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उत्तमश्लोक कथामृतम

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श्रील प्रभुपाद और महान आचार्यों के मार्गदर्शन में प्रतिदिन एक घंटा भक्ति-योग के रहस्यों को समर्पित करें।

जॉइन ज़ूम क्लास (7:30 PM)
Shri Radha Kund Prabhu Ji
वरिष्ठ प्रचारक एवं मार्गदर्शक

श्रीमान राधा कुण्ड प्रभु जी

अध्यक्ष - इस्कॉन जेवर | उपाध्यक्ष - इस्कॉन नोएडा
  • प्रभु जी पिछले 25 वर्षों से कड़े ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए हरिनाम तथा भागवत धर्म का प्रचार के रूप में समाज की सेवा कर रहे हैं।
  • परम पूज्य लोकनाथ स्वामी महाराज के अत्यंत प्रिय शिष्य, जो महाराज की व्यक्तिगत देख-रेख में शिक्षित हुए हैं।
  • थाईलैंड, म्यांमार और नेपाल में स्थित महाराज के शिष्यों के लिए 'काउंसलर' (Counsellor) के रूप में सेवा प्रदान करते हैं।
  • कोह-सामुई, थाईलैंड में एक भव्य मंदिर निर्माण में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं।
  • प्रभु जी के सरल और गहरा आध्यात्मिक अनुभव जिज्ञासुओं को शास्त्र समझने में अत्यंत सहायक होता है।

वर्तमान अध्ययन (Current Reading)

श्री प्रेमभक्ति चन्द्रिका - श्रील नरोत्तम दास ठाकुर रचित

यह ग्रंथ भक्ति मार्ग के साधकों के लिए एक दिव्य मार्गदर्शिका है, जो हृदय के अनर्थों को दूर करने की कला सिखाता है।

आज का दिव्य विचार
"अन्य अभिलाष छाडि, ज्ञान कर्म परिहरि,
काय मने कोरिबो भजन।
साधु सङ्ग कृष्ण सेवा, ना पूजिबो अन्य देवा
एइ भक्ति परम कारण॥"
अर्थ: अन्य सभी भौतिक अभिलाषाओं को त्यागकर, मैं तन-मन से श्रीकृष्ण का भजन करूँगा। साधुओं के संग में रहकर केवल कृष्ण की सेवा करूँगा; क्योंकि यह अनन्य भक्ति ही कृष्ण प्रेम को प्राप्त करने का एकमात्र उपाय है।
— श्रील नरोत्तम दास ठाकुर (प्रेमभक्ति चन्द्रिका)

हमारी स्वाध्याय यात्रा

भक्ति केवल भावना नहीं, बल्कि एक विज्ञान है। हमने अब तक यह प्रामाणिक ग्रंथों का अध्ययन पूर्ण किया है:

श्रीमद् भागवतम् (प्रथम स्कन्ध)
श्रीमद् भागवतम् (प्रथम स्कन्ध)
श्रीमद् भागवतम् (द्वितीय स्कन्ध)
श्रीमद् भागवतम् (द्वितीय स्कन्ध)
हरिनाम चिन्तामणि
हरिनाम चिन्तामणि
मनः शिक्षा
मनः शिक्षा
शरणागति
शरणागति
मुकुन्दमाला स्तोत्र
मुकुन्दमाला स्तोत्र
प्रार्थना
प्रार्थना
श्री ब्रह्मसंहिता
श्री ब्रह्मसंहिता
व्रजमण्डल दर्शन
व्रजमण्डल दर्शन
श्री कृष्ण स्वरूप चिन्तन
श्री कृष्ण स्वरूप चिन्तन
वर्तमान पाठ
श्री प्रेम भक्ति चन्द्रिका
श्री प्रेम भक्ति चन्द्रिका

महत्वपूर्ण संसाधन (Resources)

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"जीवन क्षणभंगुर है, पर भगवान का नाम और उनकी कथा शाश्वत है।"

© 2026 नित्यं भागवत-सेवया | श्रील प्रभुपाद की जय

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